समस्तीपुर: डेंगू को लेकर सदर अस्पताल प्रशासन सजग नही। Samastipur News

झुन्नू बाबा 


• नाम मात्र का एक डेंगू वार्ड बनाकर मरीज़ों को अपने हाल पर छोड़ दिया गया है



समस्तीपुर ! बिहार में डेंगू अपना पांव पसार चुकी है। इससे बिहार का समस्तीपुर जिला अभी अछूता नहीं रहा। एक और सरकार जहां डेंगू से बचाव और उसके उपचार को लेकर बड़े-बड़े दावे करती हुई नजर आती है। वहीं, समस्तीपुर सदर अस्पताल में नाम मात्र का एक डेंगू वार्ड बनाकर मरीजों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है।




 डेंगू मरीजों का उपचार तो दूर की बात है समस्तीपुर सदर अस्पताल प्रबंधन तो डेंगू से बचाव में ही फिसड्डी साबित हो गया है। बताते चलें कि विभाग का सख्त निर्देश है कि अनिवार्य रूप से सभी डेंगू मरीजों को मछरदानी उपलब्ध करवाना है। बावजूद इसके सर अस्पताल के डेंगू वार्ड में भर्ती मरीज को मछरदानी उपलब्ध नहीं कराया गया है। डेंगू वार्ड में बिना मच्छरदानी के मरीज और टूटी हुई जालीदार खिड़कियां डेंगू से लड़ाई में प्रशासनिक उदासीनता के कहानी बयां कर रही है।


आपको बताते चलें कि समस्तीपुर सदर अस्पताल स्थित जिस भवन में डेंगू वार्ड बनाया गया है वह भवन काफी जर्जर स्थिति में है। भवन के प्रवेश द्वार का लिंटर जर्जर होकर टूटकर गिर चुका है और बाकी बचा हुआ कभी भी टूटकर गिर सकता है। एक कदम आगे बढ़ने पर डेंगू वार्ड सामने में नजर आता है। जिसके दरवाजे पूरी तरह से टूट चुके हैं और उसे जुगाड़ टेक्नोलॉजी के सहारे लटका कर रखा गया है। डेंगू वार्ड की खिड़कियों में लगे हुए जाले जंग लगकर उखड़ चुके हैं। वहीं, डेंगू वार्ड में भर्ती मरीज को बिना मछरदानी के हीं पाया गया। वहीं, डेंगू वार्ड के बगल में शौचालय के पास लिंटर पूरी तरह जर्जर हो चुका है, जो कभी भी गिर सकता है।


वहीं, इस बाबत सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ गिरीश कुमार ने बताया कि डेंगू मरीजों के इलाज के लिए समस्तीपुर सदर अस्पताल में 10 बेडों का डेंगू वार्ड बनाया गया है। उन्होंने कहा के समस्तीपुर जिले में डेंगू जांच की सुविधा नहीं है। लक्षणात्मक मरीजों के ब्लड को जांच के लिए डीएमसीएच दरभंगा भेजा जाता है। जहां एलिजा के माध्यम से ब्लड की जांच की जाती है। जिसके बाद रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर मरीज को डेंगू वार्ड में भर्ती कर उपचार शुरू किया जाता है।

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