बिहार कोकिला स्वर लोक गायिक शारदा सिंन्हा का छलका दर्द कहा ये अंधेरा कब तक।>> Samastipur City

 बिहार कोकिला स्वर लोक गायिक शारदा सिंन्हा का छलका दर्द कहा ये अंधेरा कब तक 


समस्तीपुर ! वीमेंस कॉलेज से सेवानिवृत हुई है शारदा सिन्हा


मिथिला विश्वविद्यालयों में वेतन-पेंशन व्यवस्था इतनी लेट-लतीफ है कि देश की मशहूर लोक गायिका समस्तीपुर वीमेंस कॉलेज की सेवानिवृत प्रोफेसर पद्म भूषण भी अपना दर्द नहीं छिपा पायीं। चार महीनों से उन्हें पेंशन नहीं मिली है। वह अक्टूबर 2017 में रिटायर्ड हुई थीं। उन्होंने अपनी पीड़ा का इजहार अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर किया है। करीब 20 घंटा पूर्व किए गए पोस्ट में उन्होंने लिखा है कि उन्हें बीते चार महीने से पेंशन नहीं मिली है। उन्होंने बिहार सरकार की वर्तमान व्यवस्था पर भी तंज भरे लहजे में कहा है कि इस व्यवस्था पर शर्मसार हूं, आखिर ये अंधेर कब तक? शारदा सिन्हा ने अपना दर्द बयां करते हुए अपनी एक मित्र व समस्तीपुर वीमेंस कॉलेज की ही एक प्रोफेसर डॉ इशा सिन्हा (समस्तीपुर के छतौना निवासी)की व्यथा भी लिखी है। उन्होंने बताया है कि किस तरह पेंशन नहीं मिलने से परेशान उनकी करीबी दोस्त कल इस दुनिया छोड़ गईं। शारदा सिन्हा ने फेसबुक पर लिखा है कि क्या यही न्याय है। 





पटना से समस्तीपुर और समस्तीपुर से पटना इलाज के दौरान दौड़ते रहे, पैसों के इंतजाम में !!!!!!श्री सच्चिदानंद जी ! ताकि उनकी जीवन संगिनी कुछ पल और उनके साथ जीवित रह सकें। मेरी सखी ईशा जी तो चली गईं, और न जाने कितने बाकी हैं इस परेशानी को झेलने के लिए बस अब यही पता नहीं !!!!साथ ही यह बता दूं कि मैं भी पिछले 4 महीनों से बिना पेंशन ही हूं. (इसका फर्क हर सेवा निवृत को गहरा ही पड़ता है) क्या यही न्याय है बिहार सरकार या विश्वविद्यालय नियमों का ??? क्या मैं इसी राज्य का प्रतिनिधित्व करती हूं ? शर्मसार ही महसूस करती हूं इस तरह की व्यवस्था में। 

जानकारी के अनुसार ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से रिटायर्ड कर्मियों को अक्टूबर महीने से पेंशन नहीं मिला है। ऐसे में शारदा सिन्हा का यह पोस्ट काफी वायरल हो रहा है। साथ ही वर्तमान सरकार की व्यवस्था को लेकर उनका तंज भरा कटाक्ष भी खूब सुर्खियां बटोर रहा है।

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